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भारत को राफेल लड़ाकू विमान मिलने से पाकिस्तान और चीन दहशत में, जानें इसकी खासियत

भारत चीन सीमा विवाद के बीच भारतीय सेना के लिए एक अच्छी रही है. देश की सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इस महीने की 27 तारीख को भारत को 6 राफेल फाइटर जेट की खेप मिलने वाली है. विश्व में फैले कोरोना महामारी के चलते इस फाइटर प्लेन की डिलीवरी में थोड़ा समय लगा है. आपको बता दें पहले जुलाई में सिर्फ 4 राफेल विमान भारत को मिलने वाले थे लेकिन अब इसकी संख्या बढ़कर 6 हो गई है. यानी फ्रांस 27 जुलाई 2020 को भारतीय वायुसेना कुल 6 राफेल फाइटर विमान सौपेगा. फ्रांस से ये युद्धक विमान सबसे पहले अंबाला एयरबेस पर पहुंचेंगे.

फ्रांस की डेसॉल्ट एविएशन कंपनी राफेल विमान को बनाती है जो कि मल्टीरोल फाइटर विमान है. राफेल-A श्रेणी के पहले विमान ने 4 जुलाई 1986 को उड़ान भरी थी जबकि राफेल-C श्रेणी के विमान ने 19 मई 1991 को उड़ान भरी थी. राफेल विमान की वर्ष 1986 से 2018 तक 165 यूनिट बन चुकी हैं. राफेल A, B, C और M श्रेणियों में एक सीट और डबल सीट और डबल इंजन में उपलब्ध है.

भारतीय वायुसेना को साल 2022 तक 36 राफेल मिल जाएंगे, 18 राफेल हाशीमारा बेस पर तैनात होंगे. जिससे चीन पर नजर होगी और 18 राफेल हरियाणा के अंबाला में तैनात होंगे जिससे पाकिस्तान पर नजर होगी.

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राफेल दुनिया का आधुनितम फाइटर जेट है. चीन या पाकिस्तान की वायुसेना के लिए राफेल का मुकाबला करना बहुत मुश्किल है. यहां आपको ये जानना जरूरी है कि राफेल विमान में ऐसी कौन सी खूबियां हैं, जो दूसरे फाइटर प्लेन से अलग करती है. तो चलिए आपको बताते हैं इसकी खासियतें जो इसे सबसे जुदा बनाती हैं.

राफेल लड़ाकू विमान की खासियत और फीचर्स-

राफेल का इन लड़ाकू विमानों से है टक्कर-

राफेल लड़ाकू विमान अत्याधुनिक फाइटर प्लेन यूरोफाइटर टायफून, सुपर हॉर्नेट, एफ-16 ब्लॉक60, मिग-35, को टक्कर दे रहा है. इसका उपयोग अफगानिस्तान, लीबिया, माली, इराक और सीरिया की लड़ाई में भी किया गया है.

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दुनिया के लगभग सभी देशों के पास उन्नत और अच्छी किस्म के लड़ाकू विमान हैं. यहाँ तक कि हमारे पडोसी देश पाकिस्तान के पास एडवांस्ड पीढी के विमान जेएफ-17 और अमेरिका से एफ-16 हैं. इसलिए भारत को अब पांचवी पीढ़ी के विमानों की जरुरत है.

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