जानिए, क्या स्थिति है दुनियाभर के कोरोना वैक्सीन की, कहां तक पहुंचे ट्रायल

Coronavirus vaccine: कुछ वैक्सीन इंसानी ट्रायल के अंतिम स्टेज में हैं तो कुछ का ट्रायल चल रहा है. आइए जानते हैं कि दुनियाभर की कोविड वैक्सीन की क्या स्थिति है? कौन सी वैक्सीन किस स्टेज में पहुंची?

दुनियाभर में कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर ट्रायल चल रहे हैं. सभी को इंतजार है कि जल्द से जल्द कोरोना वायरस की वैक्सीन बाजार में आए. दुनियाभर में कुछ वैक्सीन इंसानी ट्रायल के अंतिम स्टेज में हैं तो कुछ का ट्रायल चल रहा है. आइए जानते हैं कि दुनियाभर की कोविड वैक्सीन की क्या स्थिति है? कौन सी वैक्सीन किस स्टेज में पहुंची?

सबसे आगे चल रही है ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन. इसने पहला इंसानी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. ब्राजील में किए गए ट्रायल में शामिल वॉलंटियर्स में वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित हुई है. ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन ChAdOx1 nCoV-19 (AZD1222) पूरी तरह से सफल होने की कगार पर है. उम्मीद जताई जा रही है कि यह वैक्सीन सितंबर 2020 तक दुनियाभर के कोरोना मरीजों को मिलने लगेगी.

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भारत में दो वैक्सीन पर ट्रायल चल रहा है. ये ट्रायल लैब के अंदर चूहों, बंदरों औऱ खरगोशों पर सफल रहे हैं. अब इनका परीक्षण देश के 13 बड़े चिकित्सा संस्थानों में इंसानों पर भी शुरू हो चुका है. सब सही रहा तो इस साल के अंत या फिर 2021 के शुरुआत तक कोरोना वायरस की भारतीय वैक्सीन आ जाएगी.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन का उत्पादन भारतीय कंपनियां AstraZeneca और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी करेगी. इसलिए उम्मीद है कि भारतीय कोरोना मरीजों को भी इस दवा का लाभ मिले.

इस समय दुनिया भर में 100 से ज्यादा कोरोना वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है. ह्यूमन ट्रायल में इस समय 19 वैक्सीन पहुंच चुकी है. हालांकि, इनमें से सिर्फ 2 वैक्सीन ही अंतिम चरण में हैं. पहली वैक्सीन है चीन की साइनोफार्मा की वैक्सीन और दूसरी है एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन.

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उधर, रूस के सेशेनोव यूनिवर्सिटी में बनाई गई कोविड वैक्सीन भी इंसानी ट्रायल के अंतिम चरण में है. रूस की इस वैक्सीन से भी दुनिया को काफी ज्यादा उम्मीदें हैं, क्योंकि रूस ने बेहद गुपचुप तरीके से वैक्सीन का ट्रायल किया और उसकी सफलता का दावा कर रहा है.

देश में भारत बायोटेक नाम की कंपनी ने कोविड-19 के खिलाफ कोरोफ्लू नाम की वैक्सीन विकसित किया है. इसका परीक्षण शुरू हो चुका है. यह वैक्सीन नाक के जरिए कोरोना मरीजों को दिया जाएगा.

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इस देश ने पहली कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने का किया दावा, इंसानों पर पूरी तरह सुरक्षित

नाक के जरिए वैक्सीन देने का मकसद सिर्फ ये है कि कोरोना वायरस सबसे ज्यादा नाक के जरिए ही किसी इंसान को संक्रमित करता है. ऐसे में नाक में टीका लगाने से कोरोना वायरस से बचाव का मजबूत तरीका मिलेगा.

Source: Aaj Tak

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Updated On: July 16, 2020 8:33 pm

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