इस दिन है वट सावित्री व्रत, जानें पूजा-विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त

Vat Savitri Vrat 2022 Date Time: हिन्दू धर्म में हर महीने कोई न कोई व्रत और त्योहार आता रहता है. जून के महीने में भी बहुत से व्रत और पर्व आने वाले है. इनमे से मुख्य वट साव‍ित्र‍ी का व्रत (Vat Savitri Vrat 2022) है. वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है.

Vat Savitri Vrat 2022: इस दिन है वट सावित्री व्रत, जानें पूजा-विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त
Vat Savitri Vrat 2022: इस दिन है वट सावित्री व्रत, जानें पूजा-विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त

Vat Savitri Vrat 2022 Date Time: हिन्दू धर्म में हर महीने कोई न कोई व्रत और त्योहार आता रहता है. जून के महीने में भी बहुत से व्रत और पर्व आने वाले है. इनमे से मुख्य वट साव‍ित्र‍ी का व्रत (Vat Savitri Vrat 2022 ) है. वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. यह व्रत पत्नी अपने पति की लंबी उम्र और संतान प्राप्ति के साथ ही घर में खुशहाली के लिए रखती है. आइये जानतें है वट सावित्री व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्त्व के बारे में

हिंदू में वट सावित्री व्रत पूजा का बहुत बड़ा महत्व है. वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2022) सुहागिन औरतें अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं. इसके साथ ही इस व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इस व्रत में महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करती है और वृक्ष के चारों परिक्रमा करती हैं. ऐसा कहा जाता है कि बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है.

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वट सावित्री व्रत 2022 कब है – Vat Savitri Vrat 2022 date

  • वट सावित्री व्रत तिथि 30 मई 2022, दिन सोमवार
  • अमावस्या तिथि प्रारंभ 29 मई दोपहर 02:55 बजे से
  • अमावस्या तिथि समाप्त 30 मई शाम 05:00 बजे

वट सावित्रि पूजा सामग्री की लिस्ट

सावित्री-सत्यवान की मूर्तियां, बांस की टोकरी, बांस का पंखा, लाल कलावा, धूप, दीप, घी, फल, फूल, रोली, सुहाग का सामान, पूडियां, बरगद का फल और जल से भरा कलश चाहिए वट सावित्रि व्रत की पूजा (Vat Savitri Vrat 2022) करने के लिए.

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वट सावित्री व्रत पूजा- विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं. इसके बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें. इस दिन बरगद या वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है. वट वृक्ष के नीचे सावित्रि और सत्यवान की मूर्ति को रखें. इसके बाद मूर्ति और वृक्ष पर जल अर्पित करें. इसके बाद सभी पूजन सामग्री अर्पित करें. लाल कलावा को वृक्ष में सात बार परिक्रमा करते हुए बांध दें. इस दिन व्रत कथा भी सुनें. इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें.

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वट सावित्री व्रत का महत्व – Importance of Vat Savitri Vrat in Hindi

  1. इस दिन व्रत करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
  2. वट सावित्री व्रत संतान प्राप्ति के लिए भी किया जाता है.
  3. इस पावन दिन बरगद के पेड़ की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और घर में खुशहाली हैं.

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Updated On: February 25, 2023 10:32 pm

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